देखैं हूँ बिन देखि हूँ, लगी रहै अति आस।कैसे हूँ न बुझाति है, ज्यौं सपने की प्यास॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+
छोड़ि नेह नंदलाल कौ, हम नहिं चाहति जोगमतिरामकविताछोड़ि नेह नंदलाल कौ, हम नहिं चाहति जोगमतिराम२ मिनट का पाठ