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मैं जान्यो मोको माधव हित है कियो

पद · लगभग २ मिनट

राग सोरठ

मैं जान्यो मोको माधव हित है कियो।अति आदर अलि ज्यों मिलि कमलहि मुख-मकरंद लियो॥बरु वह भली पूतना जाको पय-संग प्रान पियो।मनमधु अँचै निपट सूने तन यह दुख अधिक दियो॥देखि अचेत अमृत-अवलोकनि, चलि जु सींचि हियो।सूरदास प्रभु वा अधार के नाते परत जियो॥३७३॥

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