नाम हमारा ख़ाक है, हम ख़ाकी बंदे।ख़ाकहिं ते पैदा किये, अति गाफ़िल गंदे॥कबहु न करते बंदगी, दुनियाँ में भूले।असमान को ताकते, घोड़े चढ़ि फूले॥जोरू लड़के खुस किये, साहब बिसराया।राह नेकी को छोड़ि के, बुरा अमल कमाया॥हर दम तिसको याद कर, जिन वजूद संवारा।सबै ख़ाक दर ख़ाक है, कुछ समुझ गंवारा॥हाथी घोड़े ख़ाक के, ख़ाक खानखानी।कहैं मलूक रहि जायगा, औसाफ निसानी॥

