नैन भरि देख्यौ नंदकुमार।ता दिनतें सब भूलि गयौ हौं बिसर्यौ पन परवार॥बिन देखे हौं बिकल भयौं हौं अंग-अंग सब हारि।ताते सुधि है साँवरि मूरतिकी लोचन भरि भरि बारि॥रूप-रास पैमित नहीं मानों कैसें मिलौ लो कन्हाइ।कुंभनदास प्रभु गोरबधन-धर मिलियै बहुरि री माइ॥

नैन भरि देख्यौ नंदकुमार
कुंभनदासपद · लगभग २ मिनट