खर्चु बढ़ो रोजी घटी, नृपति निठुर मन कीन।रहिमन वे नर का करैं, ज्यों थोरे जल मीन॥३९॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+
बिन्दु में सिन्धु समान, को कासों अचरज कहैरहीमकविताबिन्दु में सिन्धु समान, को कासों अचरज कहैरहीम२ मिनट का पाठ