नीर बिन कृप कहाँ तेज बिन भूप कहाँ,लच्छ बिन रूप कहाँ तिरिया को बखानिबो।कालर को खेत कहाँ कपटी को हेत कहाँ,दिल बिन दान कहाँ चित्त माहीं आनिबो॥तप बिन जोग कहाँ ज्ञान बिन मौज कहाँ,कहाँ जो कपूत पूत डूब्यो कुल जानिबो।जिह्वा बिन मुख कहाँ, नैन बिन नेह कहाँ,राम से बिमुख नर पशु सो पिछानिबो॥

नीर बिन कृप कहाँ तेज बिन भूप कहाँ
टोडरमलकवित्त · लगभग २ मिनट