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निरखत अंक स्यामसुन्दर के बारबार लावति छाती

पद · लगभग २ मिनट
निरखत अंक स्यामसुन्दर के बारबार लावति छाती।लोचन-जल कागद-मसि मिलि कै ह्वै गइ स्याम स्याम की पाती॥गोकुल बसत संग गिरिधर के कबहुं बयारि लगी नहिं ताती।तब की कथा कहा कहौं, ऊधो, जब हम बेनुनाद सुनि जाती॥हरि के लाड़ गनति नहिं काहू निसिदिन सुदिन रासरसमाती।प्राननाथ तुम कब धौं मिलौगे सूरदास प्रभु बालसँघाती॥५७॥

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