राग नटनारायण ऐसी बात कहौ जनि ऊधो!ज्यों त्रिदोष उपजे जक लागति, निकसत बचन न सूधो॥आपन तौ उपचार करौ कछु तब औरन सिख देहु।मेरे कहे बनाय न राखौ थिर कै कतहूँ गेहु॥जौ तुम पद्मपराग छांड़िकै करहु ग्राम-बसबास।तौ हम सूर यहौ करि देखैं निमिष छांड़हीं पास॥१२८॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+
हरि न मिले री माई! जन्म ऐसे ही लाग्यो जानसूरदासकविताहरि न मिले री माई! जन्म ऐसे ही लाग्यो जानसूरदास२ मिनट का पाठ