राखी बांधत गरग स्याम कर।हीरा रतनन बिच-बिच मानिक पुनि-पुनि मुक्तन भर॥दच्छिना देत नंद पग लागत आसिस देत गरग सब द्विज-बर।नंददास प्रभु जियों तहां लौं ज्यौं लौं चंद सूरज मारुत धर॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+