राग नट ऊधो! जानि परे सयान।नारियन को जोग लाए, भले जान सुजान॥निगम हूँ नहिं पार पायो कहत जासों ज्ञान।नयनत्रिकुटी जोरि संगम जेहि करत अनुमान॥पवन धरि रबि-तन निहारत, मनहिं राख्यो मारि।सूर सो मन हाथ नाहीं गयो संग बिसारि॥१२९॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+