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जाय कहौ बूझी कुसलात

पद · लगभग २ मिनट

राग सारंग

जाय कहौ बूझी कुसलात।जाके ज्ञान न होय सो मानै कही तिहारी बात॥कारो नाम, रूप पुनि कारो, कारे अंग सखा सब गात।जौ पै भले होत कहुँ कारे तौ कत बदलि सुता लै जात॥हमको जोग, भोग कुबजा को काके हिये समात?सूरदास सेए सो पति कै पाले जिन्ह तेही पछितात॥४३॥

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