मधुबनियाँ लोगनि को पतिआय?मुख औरै अंतर्गत औरै पतियाँ लिखि पठवत हैं बनाय॥ज्यों कोइलसुत काग जिआवत भाव-भगति भोजनहिं खवाय।कुहकुहाय आए बसंत ऋतु, अंत मिलै कुल अपने जाय॥जैसे मधुकर पुहुप-बास लै फेरि न बूझै वातहु आय।सूर जहाँ लौं स्यामगात हैं तिनसों क्यों कीजिए लगाय?॥९१॥

मधुबनियाँ लोगनि को पतिआय?
सूरदासपद · लगभग २ मिनट