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पानी में मीन प्यासी

पद · लगभग २ मिनट
पानी में मीन प्यासी। मोहे सुन सुन आवत हांसी॥ ध्रु०॥आत्मज्ञान बिन नर भटकत है। कहां मथुरा काशी॥१॥भवसागर सब हार भरा है। धुंडत फिरत उदासी॥२॥मीरा कहे प्रभु गिरिधर नागर। सहज मिळे अविनाशी॥३॥

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