हरि चिंतामणि चिंतताँ, चिंता चित्त की जाइ।चिंतामणि चित्त में मिल्या, तहँ दादू रह्या लुभाइ॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+
रँग भरि खेलौं पिउ सौं, तहँ बाजै बेन रसालदादू दयालकवितारँग भरि खेलौं पिउ सौं, तहँ बाजै बेन रसालदादू दयाल२ मिनट का पाठ
दादू गाफिल छो वतै, मंझे रब्ब निहारदादू दयालकवितादादू गाफिल छो वतै, मंझे रब्ब निहारदादू दयाल२ मिनट का पाठ
सब तजि गुण आकार के, निहचल मन ल्यौ लाइदादू दयालकवितासब तजि गुण आकार के, निहचल मन ल्यौ लाइदादू दयाल२ मिनट का पाठ