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चलत पाइ निगुनी गुनी, धनु मनि-मुत्तिय-माल

दोहा · लगभग २ मिनट
चलत पाइ निगुनी गुनी, धनु मनि-मुत्तिय-माल।भेंट होत जयसाहि सौ, भागु चाहियतु भाल॥

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