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तुम सुणौ दयाल म्हारी अरजी

पद · लगभग २ मिनट
तुम सुणौ दयाल म्हारी अरजी॥भवसागर में बही जात हौं, काढ़ो तो थारी मरजी।इण संसार सगो नहिं कोई, सांचा सगा रघुबरजी॥मात पिता औ कुटुम कबीलो सब मतलब के गरजी।मीरा की प्रभु अरजी सुण लो चरण लगाओ थारी मरजी॥

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