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हाशिया
कविता
पूरे सूँ परचा भया, सब दुःख मेल्या दूरि
कबीर
साखी · लगभग २ मिनट
पूरे सूँ परचा भया, सब दुःख मेल्या दूरि ।
निर्मल कीन्ही आत्मा, ताथै सदा हजूर ॥३५॥
॥
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पीछे लागा जाइ था, लोक वेद के साथि
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पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुवा, पंडित भया न कोइ
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