हृदय कमल में सुरति धरि, अजपा जपै जो कोयदयाबाईकविताहृदय कमल में सुरति धरि, अजपा जपै जो कोयदयाबाई२ मिनट का पाठ
‘दया’ कह्यो गुरदेव ने, कूरम को ब्रत लेहिदयाबाईकविता‘दया’ कह्यो गुरदेव ने, कूरम को ब्रत लेहिदयाबाई२ मिनट का पाठ
नासा आगे दृष्टि धरि, स्वाँसा में मन राखदयाबाईकवितानासा आगे दृष्टि धरि, स्वाँसा में मन राखदयाबाई२ मिनट का पाठ