प्राण पंड कौं तजि चलै, मूवा कहै सब कोइ।जीव छतां जांमैं मरै, सूषिम लखै न कोइ॥२॥३४॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+
सुरति सिमृति दुई कन्नी मंदा परमिति बाहर खिंथाकबीरकवितासुरति सिमृति दुई कन्नी मंदा परमिति बाहर खिंथाकबीर२ मिनट का पाठ
सासु की दुखी ससुर की प्यारी जेठ के नाम डरौं रेकबीरकवितासासु की दुखी ससुर की प्यारी जेठ के नाम डरौं रेकबीर२ मिनट का पाठ