क्यौं हँसि हेरि हरय्यौ हियरा अरु क्यौं हित कै चित चाह बढ़ाई।काहे कौं बोलि सुवासने बैननि, चैननि मैननि सेन चढ़ाई।सौ सुधि मो हिय में घनआनँद सालति क्यौं हूँ कढ़े न कढ़ाई।मीत सुजान अनीत की पाटी दृते पै न जानियै कौनै पढ़ाई॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+
लगी है लगनि प्यारे पगी है सुरति तोसोंघनानंदकवितालगी है लगनि प्यारे पगी है सुरति तोसोंघनानंद२ मिनट का पाठ