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क्यौं हँसि हेरि हरय्यौ हियरा अरु

सवैया · लगभग २ मिनट
क्यौं हँसि हेरि हरय्यौ हियरा अरु क्यौं हित कै चित चाह बढ़ाई।काहे कौं बोलि सुवासने बैननि, चैननि मैननि सेन चढ़ाई।सौ सुधि मो हिय में घनआनँद सालति क्यौं हूँ कढ़े न कढ़ाई।मीत सुजान अनीत की पाटी दृते पै न जानियै कौनै पढ़ाई॥

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