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जाकै हरि सा ठाकुर भाई

पद · लगभग २ मिनट
जाकै हरि सा ठाकुर भाई। सु कति अनत पुकारन जाई।अब कहु राम भरोसा तोरा। तब काहूँ को कौन निहोरा॥तीनि लोक जाके इहि भार। मो काहे न करै प्रतिपार।कहु कबीर इक बुद्धि बिचारी। क्या बस जौ बिष दे महतारी॥82॥

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