करौं मन! हरि भक्तन कौ संग।भक्तन बिन भगवंत दुर्लभ अति जग यह प्रगट प्रसंग॥ध्रुव, प्रह्लाद, बिभीषन, कपिपति कामी मरकट अंग।पूज्य भये जस पाय जगत में जीत्यौ रावन जंग॥गीध, ब्याध, गनिका, ब्रजगोपी, द्विज-बंधु सुवन उपंग।अजामील अपमारग-गामी लंपट बिवस अनंग॥जातुधान, चारन, विद्याधर वनपति हिंसक अभंग।सबरी केवट पूज्य भये जग राम उतारे गंग॥श्रीहरिव्यास बिना गति नाहीं तजौ मान मद रंग।‘किसोरीदास’ जाचत दीजै प्रभु, संतन सँग सुरंग॥

करौं मन! हरि भक्तन कौ संग
किशोरीदासपद · लगभग २ मिनट