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मैं समुइयौ निरधार, यह जग काँचो काँच सौ

दोहा · लगभग २ मिनट
मैं समुइयौ निरधार, यह जग काँचो काँच सौ।एकै रूपु अपार प्रतिबिंबित लखियतु जहाँ॥

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