मुकलित बकुल मधुप-कुल कूंजे,प्रफुलित कमल, गुलाब फूले।मंगलगान करत कोकिल-कुल,नव मालती लता लगि झूले॥आईं जुवति-जूथ रास-मंडल खेलत,स्याम तरनिजा कू ले।छीतस्वामी बिहरत वृंदावन,गिरिधर लाल कल्पतरू मूले॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+