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हाशिया
कविता
चित्रकूट में रमि रहे, रहिमन अवध नरेस
रहीम
दोहा · लगभग २ मिनट
चित्रकूट में रमि रहे, रहिमन अवध नरेस।
जेहि पर बिपदा परत है, सो आवत यहि देस॥५८॥
॥
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चारा प्यारा जगत में, छाला हित कर लेइ
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छमा बड़ेन को चाहिए, छोटेन को उतपात
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रहीम
कविता
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रहीम
कविता
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रहीम
कविता
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रहीम
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