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मन कै मैलौ बाहरि ऊजलौ किसी रे

पद · लगभग २ मिनट
मन कै मैलौ बाहरि ऊजलौ किसी रे,खाँडे की धार जन कौ धरम इसी रे॥ टेक॥हिरदा कौ बिलाव नैन बगध्यानी,ऐसी भगति न होइ रे प्रानी॥कपट की भगति करै जिन कोई,अंत की बेर बहुत दुख होई॥छाँड़ि कपट भजौ राम राई,कहै कबीर तिहुँ लोक बड़ाई॥233॥

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