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सहज सुन्नि मन राखिये, इन दून्यूँ के माहिं

दोहा · लगभग २ मिनट
सहज सुन्नि मन राखिये, इन दून्यूँ के माहिं।लय समाधि रस पीजिये, तहाँ काल भय नाहिं॥

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