सहज सुन्नि मन राखिये, इन दून्यूँ के माहिं।लय समाधि रस पीजिये, तहाँ काल भय नाहिं॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+
दादू समझि समाइ रहु, बाहरि कहि न जणाइदादू दयालकवितादादू समझि समाइ रहु, बाहरि कहि न जणाइदादू दयाल२ मिनट का पाठ
जैसा है तैसा नाउँ तुम्हारा, ज्यौं है त्यौं कहि साईँदादू दयालकविताजैसा है तैसा नाउँ तुम्हारा, ज्यौं है त्यौं कहि साईँदादू दयाल२ मिनट का पाठ