जो पै चोंप मिलनकी होय।तौ क्यों रहै ताहि बिनु देखे लाख करौ जिन कोय॥जो यह बिरह परस्पर ब्यापै जो कछु जीवन बनै।लोकलाज कुलकी मरजादा एकौ चित्त न गनै॥कुंभनदास प्रभु जाय तन लागी और न कछू सुहाय।गिरधरलाल तोहि बिनु देखे छिन-छिन, कलप बिहाय॥

जो पै चोंप मिलनकी होय
कुंभनदासपद · लगभग २ मिनट