नैया मेरी नीके चलन लागी।आंधी मेंह तनिक नहि डोलो, साहु चढे बड़भागी॥रामराय डगमगी छोड़ाई, निर्भय कड़िया लैया।गुन लहासि की हाजत नाही, आछा साज बनैया॥अवसर पड़े तो पर्बत बोझै, तहूँ न होवै भारी।धन सतगुरु यह जुगत बताई, तिन की मैं बलिहारी॥सूखे पड़े तो कछु डर नाहीं, ना गहिरे का संसा।उलटि जाय तो बार न बांके, या का अजब तमासा॥कहत मलूक जो बिन सिर खेवै, सो यह रूप बखाने।या नैया के अजब कथा, कोइ बिरला केवट जाने॥

नैया मेरी नीके चलन लागी
मलूकदाससबद · लगभग २ मिनट