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हाशिया
कविता
है अकबर घर हाण
दुरसा आढ़ा
सोरठा · लगभग २ मिनट
है अकबर घर हाण, डाण ग्रहे नीची दिसट।
तजै न ऊची ताण, पोरस राण प्रतापसी॥
॥
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