दीप-दान दै स्याम मनोहर सब गाइनि के कान जगावत।गांग बुलाई धूमरि धौरी ऊंचे लै-लै नाउँ बुलावत॥होइ सचेत भोर खेलन कों दौरी आवै नेकुं सुनावत।सनमुख जाइ कूक मारत हैं मुख पट फेरि पछोंडे धावत॥मुदित गोपाल ग्वाल सुबल लै ताकौ बछरा ताहि मिलावत।‘चतुर्भुज’ प्रभु गिरिधरन डाढ सुनि सँस गावत कर ताल बजावत॥

दीप-दान दै स्याम मनोहर
चतुर्भुजदासपद · लगभग २ मिनट