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हाशिया
कविता
छोटेन सों सोहैं बड़े, कहि रहीम यहि लेख
रहीम
दोहा · लगभग २ मिनट
छोटेन सों सोहैं बड़े, कहि रहीम यहि लेख।
सहसन को हय बाँधियत, लै दमरी की मेख॥५२॥
॥
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छमा बड़ेन को चाहिए, छोटेन को उतपात
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जद्यपि अवनि अनेक हैं, तोयवन्त सर ताल
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सुन्दर चतुर धनिकवा, कुल को ऊँच
रहीम
कविता
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रहीम
२ मिनट का पाठ
हँसि-हँसि हेरि अरसिआ, सहज सिंगार
रहीम
कविता
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रहीम
२ मिनट का पाठ
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रहीम
कविता
सुनि धुनि कान मुरलिआ, रागन-भेद
रहीम
२ मिनट का पाठ