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राधा मोहन-लाल को, जाहि न भावत नेह

दोहा · लगभग २ मिनट
राधा मोहन-लाल को, जाहि न भावत नेह।परियौ मुठी हज़ार दस, ताकी आँखिनि खेह॥

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