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प्रीतम की प्रेम गति देखै भूली तन गति

कवित्त · लगभग २ मिनट
प्रीतम की प्रेम गति देखै भूली तन गति,बड़े-बड़े नैना दोऊ आये प्रेम जल भरि।प्रिया लाल-लाल कहि लिए लाइ उर जन,चूँमि-चूँमि नैना रही अधर दशन धरि॥हित ध्रुव सखी सब देखत विवस भई,प्रेम पट नाना रंग झलकै सबनि परि।एक चित्र की-सी खरी एक धर खसि परी,एकनि के नैनन तैं गिरै नेह नीर ढरि॥

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