ऐसे लोगनि सूँ का कहिये।जे नर भये भगति थैं न्यारे, तिनथैं सदा डराते रहिये॥ टेक॥आपण देही चरवाँ पाँनी ताहि निंदै जिनि गंगा आनी॥आपण बूड़ैं और कौ बोड़ै, अगनि लगाइ मंदिर मैं सोवै॥आपण अंध और कूँ काँनाँ, तिनकौ देखि कबीर डराँनाँ।144॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+
सुरति सिमृति दुई कन्नी मंदा परमिति बाहर खिंथाकबीरकवितासुरति सिमृति दुई कन्नी मंदा परमिति बाहर खिंथाकबीर२ मिनट का पाठ
हम घर सूत तनहि नित ताना कंठ जनेऊ तुमारेकबीरकविताहम घर सूत तनहि नित ताना कंठ जनेऊ तुमारेकबीर२ मिनट का पाठ