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हाशिया
कविता
बेद पढ़ई पंडित बन्यो, गांठ पन्ही तउ चमार
रैदास
दोहा · लगभग २ मिनट
बेद पढ़ई पंडित बन्यो, गांठ पन्ही तउ चमार।
रैदास मानुष इक हइ, नाम धरै हइ चार॥
॥
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रैदास न पूजइ देहरा, अरु न मसजिद जाय
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नीचं नीच कह मारहिं, जानत नाहिं नादान
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रैदास
कविता
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कविता
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रैदास
कविता
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