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हाशिया
कविता
कह मलूक हम जबहिं ते, लीन्हों हरि को ओट
मलूकदास
दोहा · लगभग २ मिनट
कह मलूक हम जबहिं ते, लीन्हों हरि को ओट।
सोवत है सुख नींद भरि, हरि भरम की पोट॥
॥
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करें भक्ति भगवंत की, कबहुं करै नहिं चूक
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