मेरो सुभाव चितैवे को माइ री लाल निहारि कै बंसी बजाई।वा दिन ते मोहि लागी ठगौरी सी लोग कहै कोई बावरी आई॥यों रसखानि घिर्यो सिगरो ब्रज जानत वे कि मेरो जियराई।जौ कोउ चाहै भलौ अपनो तौ सनेह न काहू सो कीजियौ माई॥

मेरो सुभाव चितैवे को माइ री
रसखानसवैया · लगभग २ मिनट