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हाशिया
कविता
मधुर बचन तैं जात मिट उत्तम जन अभिमान
वृंद
दोहा · लगभग २ मिनट
मधुर बचन तैं जात मिट उत्तम जन अभिमान।
तनिक सीत जल सौं मिटै जैसे दूध उफान॥
॥
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वृंद
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वृंद
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