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कैसे नगरि करौं कुटवारी, चंचल पुरिष बिचषन नारी

पद · लगभग २ मिनट
कैसे नगरि करौं कुटवारी, चंचल पुरिष बिचषन नारी॥ टेक॥बैल बियाइ गाइ भई बाँझ, बछरा दूहै तीन्यूँ साँझ॥मकड़ी धरि माषी छछि हारी, मास पसारि चीन्ह रखवारी॥मूसा खेटव नाव बिलइया, मीडक सोवै साप पहरइया॥निति उठि स्याल स्यंघ सूँ झूझै, कहै कबीर कोई बिरला बूझै॥80॥

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