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ऊधो! बेदबचन परमान

पद · लगभग २ मिनट

राग नट

ऊधो! बेदबचन परमान।कमल मुख पर नयन-खंजन देखिहैं क्यों आन?श्री-निकेत-समेत सब गुन, सकल-रूप-निधान।अधर-सुधा पिवाय बिछुरे पठै दीनो ज्ञान॥दूरि नहीं दयाल सब घट कहत एक समान।निकसि क्यों न गोपाल बोधत दुखिन के दुख जान?रूप-रेख न देखिए, बिन स्वाद सब्द भुलान।ईखदंडहि डारि हरिगुन, गहत पानि बिषान॥बीतराग सुजान जोगिन, भक्तजनन निवास।निगम-बानी मेटिकै क्यों कहै सूरदास?॥२२९॥

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