बाबा जोगी एक अकेला, जाके तीर्थ ब्रत न मेला॥ टेक॥झोलीपुत्र बिभूति न बटवा, अनहद बेन बजावै॥माँगि न खाइ न भूखा सोवै, घर अँगना फिरि आवै॥पाँच जना का जमाति चलावै, तास गुरु मैं चेला॥कहै कबीर उनि देस सिधाय, बहुरि न इहि जगि मेला॥207॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+