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सीत हरत तम भ्रम मिटत, नैन खुलत बे चूक

दोहा · लगभग २ मिनट
सीत हरत तम भ्रम मिटत, नैन खुलत बे चूक।का रहीम रबि को घट्यो, जो नहिं लख्यो उलूक॥२४८॥

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