मेरी सूचीपढ़ना शुरू करें

मन रे कागज कोर पराया, कहा भयौ ब्यौपार तुम्हारै, कल तर बढ़े सवाया

पद · लगभग २ मिनट
मन रे कागज कोर पराया, कहा भयौ ब्यौपार तुम्हारै, कल तर बढ़े सवाया॥ टेक॥बड़े बौहरे साँठी दीन्हौ कलतर काढ़ो खोटै॥चार लाख अरु असी ठीक दे जनम लिष्यो सब चोटै॥अबकी बेर न कागद कीरौं, तौ धर्म राई सूँ तूटै॥पूँजी बितड़ि बांदे ले दैहै, तब कहै कौन के छूटै॥गुरुदेव ग्याँनी भयौ लगनियाँ, सुमिरन दीन्हौ हीरा॥बड़ी निसरना नाव राम कौ, चढ़ि गयौ कीर कबीरा॥108॥

अब कुछ और पढ़ें