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तरु पतझारन में किशलित डारन में

कवित्त · लगभग २ मिनट
तरु पतझारन में किशलित डारन में,रमित पहारन में दुनी में दिगंत है।त्रिबिध समीरन में यमुना के तीरन में,उड़त अबरीरन में झला झलकंत है॥छाय रह्यो गुंजन में अलिपुंज कुंजन में,गान में गोपाल ऐसो रूप दरशंत है।फूल में दुकूल में तड़ागन में बागन में,डगर में बगर में बगरो बसंत है॥

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