कंचन स्यो पाइयै नहीं तोलि। मन दे राम लिया है मोलि॥अब मोहि राम अपना करि जान्या। सहज सुभाइ मेरा मन मान्या॥ब्रह्मै कथि कथि अंत न पाया। राम भगति बैठे घर आया॥बहु कबीर चंचल मति त्यागी। केवल राम भक्ति निज भागी॥36॥

कंचन स्यो पाइयै नहीं तोलि
कबीरपद · लगभग २ मिनट