सो दिन कबहूँ आवैगा।दादूड़ा पीव पावैगा॥क्यूँ ही अपने अंगि लगावैगा, तब सब दुख मेरा जावेगा॥पीव अपने बैंन सुनावैगा, तब आनंद अंगि न मावैगा॥पीव मेरी प्यास मिटावैगा, आप ही प्रेम पिलावैगा॥दे अपना दरस दिखावैगा, तब दादू मंगल गावैगा॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+
सतगुर माला मन दिया, पवन सुरति सूँ पोइदादू दयालकवितासतगुर माला मन दिया, पवन सुरति सूँ पोइदादू दयाल२ मिनट का पाठ
रँग भरि खेलौं पिउ सौं, तहँ बाजै बेन रसालदादू दयालकवितारँग भरि खेलौं पिउ सौं, तहँ बाजै बेन रसालदादू दयाल२ मिनट का पाठ
जैसा है तैसा नाउँ तुम्हारा, ज्यौं है त्यौं कहि साईँदादू दयालकविताजैसा है तैसा नाउँ तुम्हारा, ज्यौं है त्यौं कहि साईँदादू दयाल२ मिनट का पाठ