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हाशिया
कविता
उपजावै अनुराग
कृपाराम खिड़िया
सोरठा · लगभग २ मिनट
उपजावै अनुराग, कोयल मन हरखत करै।
कड़वौ लागै काग, रसना रा गुण राजिया॥
॥
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