प्रज्वलित ज्वाल प्रलै-ज्वालन की दोपति,कै दीपत प्रदीप दीपिकान के बहल की।बारहू बिभाकर उये की झलाझली कैंधो,बलाबली लगी जेब जगी देवदल की॥भनै ‘समाधान’ हिमवान भामिनी है कैंधो,दामिनी है तेजरासि तारन के झल की।जकाजकी छोड़ि टकाटकी अरिनाहि जाहि,हकाहकी देखि झकाझकी द्रोनाचल की॥

प्रज्वलित ज्वाल प्रलै-ज्वालन की दोपति
खुमान बंदीजनकवित्त · लगभग २ मिनट