सोनजुही सी जगमगति, अँग-अँग जोबन-जोति।सु-रंग, कसूँभी कंचुकी, दुरँग देह-दुति होति॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+
हरि हरि! बरि बरि उठति है, करि-करि थकी उपाइबिहारीकविताहरि हरि! बरि बरि उठति है, करि-करि थकी उपाइबिहारी२ मिनट का पाठ
मिलि चंदन-बेंदी रही, गौरैं मुँह न लखाइबिहारीकवितामिलि चंदन-बेंदी रही, गौरैं मुँह न लखाइबिहारी२ मिनट का पाठ
छ्वै छिगुनी पहुँचौ गिलत, अति दीनता दिखाइबिहारीकविताछ्वै छिगुनी पहुँचौ गिलत, अति दीनता दिखाइबिहारी२ मिनट का पाठ